World Population Day का थीम है 8 billion की दुनिया : सभी के लिए अवसर , अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करना

 Jansankhya divas 2022

8 अरब से ज्यादा आबादी की इस दुनिया में क्या सबके लिए समान अधिकार है? क्या सबके पास रोजगार है? इस साल के ‘World Population day’  का थीम है  8 billion की दुनिया : सभी के लिए अवसर , अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करना’ रोजगार की समस्या का समाधान ढुंढने की कोशिश में इस थीम को रखा गया है……   समय के साथ साथ तेज़ी से आबादी भी बढ़ती जा रही है। लगातार बढ़ती जनसंख्या भी विकास में बाधा है। चीन के बाद भारत सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है।

एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ वर्षों में भारत चीन को पछाड़ कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा । भुखमरी, बेरोज़गारी, अशिक्षा, गरीबी जैसी तमाम परेशानियों के लिए भी जनसंख्या में वृध्दि ही जिम्मेंदार बनती जा रही है, जिस पर ध्यान देना बहुत ज़रुरी है।….

हर साल 11 जुलाई को ‘World Population Day’ या ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ के रुप में मनाया जाता है। इस साल 30वां जनसंख्या दिवस मनाया गया।  इस दिन को मनाने का सुझाव डॉ. के.सी. जैक्रियाह ने दिया था , उन्होंने दुनिया को विश्व की जनसंख्या करीब 5 अरब तक पहुंचने का आकड़ा बताया था। 1987 में जनसंख्या 5 अरब पहुंचने के बाद United Nation Development Program  ने इस बात पर चिंता जताते हुए यह तय किया कि इस दिन को jansankhya divas 2022 के रुप में मनाया जाएगा.

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जिससे बढ़ती जनसंख्या और उससे होने वाली समस्याओं , पर्यावरण और इसके विकास के सभी मुद्दों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया जा सके, जिसके बाद 1989 से हर साल इस दिन को ‘World Population Day’ के रुप में मनाया जाने लगा। पहले इस दिन को विश्व के विकास और प्रगति के लिए भी मनाया जाता था मगर अब सिर्फ जनसंख्या नियंत्रण और बढ़ती जनसंख्या की खामियों से लोगों को जागरुक करने के लिए मनाया जाता है। इस मौके पर कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते है, जिसमें जनसंख्या नियंत्रण के बारे में बात की जाती है और साथ ही गरीबी, जच्चे-बच्चे के स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, परिवार योजना , मानव अधिकार पर भी चर्चा की जाती है।

World Population Day

कोरोना काल में बढ़ी हुई जनसंख्या का दुष्प्रभाव साफ नज़र आया है, स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा हर क्षेत्र में मुश्किलें हुई हैं। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण का महत्व समझना और भी ज़रुरी हो गया है।…….. कोरोना काल में बढ़ी जनसंख्या की वजह से दवाईयों और oxygen का shortage हुआ जिसकी वजह से लोगों को तुरंत ईलाज नहीं मिल पा रहा था, जिससे लोगों को कई सारी दिक्कतें हुई और कई सारें लोगों की मौत भी हो गई।

जहां इतनी आबादी हैं वहां उतना ही कम रोजगार और कहीं ज्यादा competition  भी है। भारत की अकेले की आबादी करीब 1.38 अरब है और कोरोना वाइरस के कहर के बाद भारत में बेरोजगारी 20% से बढ़ गई है। एक रिर्पोट के अनुसार….. प्रतिवर्ष जनसंख्या 1करोड़ 60लाख बढ़ रहा है। दुनिया की लगभग 18 फीसद जनसंख्या भारत में निवास करती है।

World Population Day, jansankhya divas 2022
World Population Day

सरकार की लगातार कोशिशों के बाद भी हकीकत यही है कि बढ़ी हुई जनसंख्या के कारण लोग भूखे पेट सोने और अशिक्षित रहने के लिए मजबूर है, उनके पास ना अवसर है और ना ही सुविधा। भारत जैसे  developing country  के लिए यह संभव ही नहीं है. कि वो इतनी बड़ी जनसंख्या को रोजगार दे पाए। अगर आबादी कम होती तो लोगों को विकास के अवसर भी बराबर मिलते जिससे लोगों में भेद-भाव भी कम होता।………………

बढ़ती आबादी का एक मुख्य कारण है illiteracy, लोगों में जानकारी और जागरुकता की कमी होना। लोगों को ना ही इसके बारें में जानकारी है और ना ही लोग जागरुक है। लोगों को आज भी गर्भनिरोधक दवाईयों और सुरक्षित यौन संबंधो के बारे में जानकारी ही नहीं है. सरकार लगातार कई सारे कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है

जिसके द्वारा लोगों को शिक्षित और जागरुक किया जा रहा है। कई लोगों को Family planning के बारें में बात करना आज भी गलत लगता है,  जिसके कारण वो अपनें युवा बच्चों की शादी बिना ही family planning  की जानकारी के कर देते है और अज्ञानता के कारण वो बच्चे पैदा कर बैठते है।…. वहीं कई लोगों का आज भी मानना है कि परिवार को आगे बढ़ाने के लिए और बुढ़ापे के सहारे के लिए लड़का जरुरी होता है ,जिस कारण वो कई सारे बच्चे पैदा कर बैठते है। लड़कियों को गर्भनिरोधक के उपाय में जानकारी नहीं दी जाती हैं, जिसके कारण कई मामलों में शादी के बाद अनचाहे गर्भ से बचने की जानकारी ही नहीं होती।

प्रेरक महिलाओं पर संवाददाता कार्यक्रम कें दौरान जारी की लघु फिल्में

प्रकृति के साधनों की एक सीमा है लेकिन अपने देश में जनसंख्या बढ़ने की कोई सीमा नहीं है। दुनिया की  केवल 2.4% जमीन, 4 % पीने का पानी और 2.4% जंगल भारत में उपलब्ध है। World Bank के अनुसार करीब 22 करोड़ लोग हमारे देश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे है।

15 फीसद आबादी कुपोषण की शिकार है। वहीं 26 फीसद आबादी अशिक्षित है। जहां हर साल 1.2 लाख लोग रोजगार के बाज़ार में उतरते है वहां रोज़गार एक बड़ी चुनौती बन चुका है। आजादी के 70 साल बाद भी राजनीतिक दल जनसंख्या जैसी गंभीर समस्या को अपने चुनाव घोषनापत्र में शामिल नही कर पाये हैं।

ये एक शुभ संकेत है कि देश में कई सारे सामाजिक संगठन बढ़ती जनसंख्या के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। अब यह ज़रुरी हो चुका है….. कि सभी राजनीतिक दल एकजुट हो कर धर्म, जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून और निति बनाएं और जनसंख्या से होने वाली समस्याएं जैसे  बेरोजगारी, सवास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा से छुटकारा दिला पाए।

ये जानकारी लिखी थी हमारी साथी अदिति ने। अन्य जानकारी के लिए बने रहे THE NEWS 15 के साथ

 

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