Fight for Tiranga ” अब तिरंगे के लिए होगी पॉलिएस्टर और खादी के बीच जंग

Fight for Tiranga : केंद्र सरकार ने बनाई पॉलिएस्टर से तिरंगे बनाने की योजना, कर्नाटक हुबली की खादी इकाई ने किया विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन करने का ऐलान

चरण सिंह राजपूत

Fight for Tiranga : क्या आजादी की पहचान बन चुकी खादी का वजूद संकट में है ? वैसे तो खादी की जगह पॉलिएस्टर ने ले ही ली है पर देशभक्ति और स्वाभिमान का प्रतीक तिरंगा आज भी खादी से बनता है। यदि यह सुनने को मिले कि अब तिरंगा भी पॉलिएस्टर से बनेगा तो अजीब लगेगा न। जी हां केंद्र सरकार ने अब तिरंगे को भी पॉलिस्टर से बनाने की योजना बनाई है। देश में खादी से तिरंगे बनाने वाली खादी इकाइयों से प्रमुख कर्नाटक हुबली की इकाई ने केंद्र सरकार की इस योजना का विरोध किया है। इस इकाई के मजदूर अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। इन मजदूरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पॉलिएस्टर से तिरंगे बनाने वाली योजना का विरोध किया है।

Fight for Tiranga, Karnataka Khadi Village Industries Joint Association, Preparing to go to Supreme Court

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कर्नाटक हुबली में स्थित तिरंगा बनाने वाली खादी इकाई अन्य प्रदेशों की अन्य ईकाइयों के साथ मिलकर आंदोलन की रूपरेखा बना रही है। Karnataka Khadi Village Industries Joint Association का कहना है कि इस योजना के चलते हुबली की इकाई को बंद करना पड़ सकता है। दरअसल भारतीय मानक ब्यूरो की ओर से दिये गये निर्देशों के मुताबिक कर्नाटक खादी ग्रामोद्योग संयुक्त संघ शुद्ध खादी के झंडे का निर्माण करता है। संयुक्त संघ के सचिव शिवानंदा मथापति ने अंग्रेजी अखबार टेलीग्राफ से बातचीत करते हुए कहा है कि वे लोग सरकार के द्वारा पॉलिएस्टर का झंडा बनाने के निर्णय के खिलाफ आंदोलन करने जा रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि वे लोग योजना आदेश के खिलाफ Preparing to go to Supreme Court. उन्होंने बताया कि उनका आंदोलन कर्नाटक से शुरू होगा और फिर दूसरे अन्य राज्यों में स्थित खादी यूनिट्स के माध्यम से पूरे देश में इस आंदोलन को फैला दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि उनकी कोशिश होगी कि किसी भी तरह से सरकार को समझाया जाए और वह अपने निर्णय को वापस ले।

उन्होंने कहा है कि वे लोग सरकार के इस निर्णय को लेकर पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख चुके हैं और उनके जवाब का इंतजार कर रहेे हैं। हालांकि Karnataka Khadi Village Industries Joint Association ने अपने देशव्यापी आंदोलन की तारीखों के बारे में कोई भी खुलासा नहीं किया है। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस की वजह से तिरंगों की अधिक मांग के चलते इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया है।

मथापित ने बताया कि अकेले कर्नाटक में खादी सेक्टर से 45 हजार लोग linked employment. अगर खादी के तिरंगों की मांग में कमी आती है तो इसका सीधा प्रभाव इन लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। मथापति ने आगे कहा कि सरकार ने यह निर्णय शायद हर घर तिरंगा कैंपेन के लिए लिया है, जिसमें सरकार का लक्ष्य आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर हर घर में तिरंगा पहुंचाना है। लेकिन हमें खादी से जुड़ी पवित्रता को याद रखने की जरूरत है। यही वजह है कि हमारे संस्थापक चाहते थे कि सभी राष्ट्रीय झंडे खादी से बने हों। यही कारण है कि केंद्र ने 2019 में प्लास्टिक के राष्ट्रीय झंडे के आायत पर प्रतिबंध लगा दिया था। कांग्रेस ने संयुक्त मोर्चा का समर्थन करते हुए का कि सरकार ने यह निर्णय अपने पॉलिएस्टर बनाने वाले पूंजीपति मित्रों के समर्थन में लिया है और यह स्वतंत्रता आंदोलन की भावना का उल्लंघन करता है।

Fight for Tiranga, Karnataka Khadi Village Industries Joint Association, Preparing to go to Supreme Court

दरअसल जब देश में आजादी की लड़ाई लड़ी गई तो खादी क्रांतिकारियों की पहचान बन चुकी थी। यही वजह रही कि देश के आजाद होने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समाजसेवकों ने खादी के कपड़ों को तवज्जो दी। चाहे लोकसभा और या विधनासभा या फिर कोई सा भी सदन। हर सदन में अधिकतर लोग खादी के कपड़ों में दिखेंगे।

दरअसल 75th anniversary of independence के मौके पर केद्र सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान चलाने की योजना बनाई है। इसके चलते तिरंगे खादी की जगह पॉलिएस्टर के बनाने की बात कही जा रही है।

कांग्रेस ने तिरंगे को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। कांग्रेस के सिक्कम, त्रिपुरा एवं नागालैंड के प्रभारी महासचिव डॉ. अजय कुमार ने कहा है कि भाजपा सरकार ने पॉलिएस्टर निर्मित राष्ट्रीय ध्वज के निर्मार और आयात की अनुमति देने के लिए भारतीय झंडा संहिता में संशोधन करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अब तिरंगे भी चीन से आएंगे, जैसे कि स्टैच्यू ऑप यूनिटी पूरी तरह से चीन से बनकर आई है। बालीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने सरकार की इस योजना पर सवाल उठाया है।

ऐसे में प्रश्न उठता है कि केंद्र सरकार की ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि तिरंगों को पॉलिएस्टर का बनवाना पड़ रहा है। क्या देश में खादी के तिरंगे बनवाने का अलग से बजट तैयार नहीं कराया जा सकता है ? ऐसा कितना खर्चा खादी से तिरंगे बनवाने में लग जाता ? 75th anniversary of independence पर हर घर तिरंगा अभियान तो अच्छा है पर तिरंगे पॉलिएस्टर के क्यों ? तो फिर देश में Fight for Tiranga के नारे लगेंगे।

 

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